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Thursday, 19 July 2012

प्यार लिख रहा हूँ

        प्यार लिख रहा हूँ

टूटी हुई कलम  से अपना प्यार लिख रहा हूँ ,
इस दिल का मै पहला इजहार लिख रहा हूँ ।
चाहता हूँ तुझे दिलो जान से हरदम ,
तू ही है दिलबर,तू  ही है  मेरी सनम,
मै  ये तराना हजार बार लिख रहा हूँ ।।
टूटी हुई कलम  से......................................।
              इन गलियों में तेरा ओ आना जाना ,
              याद आती है तेरा,मुझे देखकर मुस्कुराना ।
              तन्हा हूँ मै इस जहाँ में अब तेरे बिन,
              सुनी पड़ी है कब से दिल का ये आशियाना।।
              तेरे आने पर इस दिल में बहार लिख रहा हूँ,
              टूटी हुई कलम  से.......................................।
बसाई है मैंने इस दिल में प्यारी सी तेरी मूरत,
सांसो से भी जादा है मुझे अब तेरी जरुरत।
जुदाई सह नही सकता अब एक पल भी तुम्हारी,
मुद्दत से देखी नही इन आँखों ने तेरी सूरत।।
आज इन आँखों से तेरा दीदार लिख रहा हूँ,
             टूटी हुई कलम  से.......................................।
             तू ही है  मेरी जहाँ,तू ही है मेरी जानो जिग़र,
             तू ही मेरा एहसास है, तू है मेरी नज़र ।
             दिल लगाकर तुझसे ये जाना है मैंने,
             काँटों भरा है मोहब्बत का ये सफ़र ।।
             फिर भी इस दिल में इश्क बेसुमार लिख रहा हूँ,
             टूटी हुई कलम  से.......................................।
ये कभी न कहना तुम्हे मुझसे प्यार नही ,
तुझे मुझ पर भरोशा, मेरा एतबार नही।
तुम बिन न जी सकूँगा एक पल इस जहाँ में ,
गम लाख सह सकता हूँ,पर तेरा इंकार नहीं।।
अब तेरे बिन जीना दुश्वार लिख रहा हूँ ,
टूटी हुई कलम  से अपना प्यार लिख रहा हूँ ,
इस दिल का मै पहला इजहार लिख रहा हूँ ।।

                                                         -  अरुण शर्मा  

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