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Saturday, 21 July 2012

दिल में उठी एक प्यास है

दिल में उठी एक प्यास   है

मेरे ह्रदय की  अंतर्मन में ,
बस तेरा ही वास है ।

तेरा ही नाम लेता अब ,
मेरा हर एक सास है ।

तुम दूर हो मुझसे मगर ,
तेरी वो यादे मेरे पास है ।

धड़कने मेरी गिनता है सावन भादो ,
गिनता अब हर एक मास है।

बिछड़े तुमसे बरसों बित गये ,
मिलने का अब भी आस है ।

तू नही है मेरे साथ मगर ,
हर पल तेरा एहसास है ।

इस वीरान दिल की दुनिया को ,
सिर्फ तेरा ही तलाश है ।

चाहता हूँ हो जाऊं तुमसे मुक्त मै ,
पर बाँधे रखती तेरे प्यार का फास है।

घनघोर बरसती इन बरसातों में ,
ये  बहकाती हुई कैसी सुवास है ,

बरसते है हर क्षण  मेरी ये आँखे ,
फिर भी दिल  में उठी एक प्यास है । 

                                              - अरुण शर्मा  

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