दिल में उठी एक प्यास है
मेरे ह्रदय की अंतर्मन में ,बस तेरा ही वास है ।
तेरा ही नाम लेता अब ,
मेरा हर एक सास है ।
तुम दूर हो मुझसे मगर ,
तेरी वो यादे मेरे पास है ।
धड़कने मेरी गिनता है सावन भादो ,
गिनता अब हर एक मास है।
बिछड़े तुमसे बरसों बित गये ,
मिलने का अब भी आस है ।
तू नही है मेरे साथ मगर ,
हर पल तेरा एहसास है ।
इस वीरान दिल की दुनिया को ,
सिर्फ तेरा ही तलाश है ।
चाहता हूँ हो जाऊं तुमसे मुक्त मै ,
पर बाँधे रखती तेरे प्यार का फास है।
घनघोर बरसती इन बरसातों में ,
ये बहकाती हुई कैसी सुवास है ,
बरसते है हर क्षण मेरी ये आँखे ,
फिर भी दिल में उठी एक प्यास है ।
- अरुण शर्मा
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