दिल का दर्द
दिल का दर्द मै तुमको दिखाऊँ कैसे,
आंसुओ को अपनी सबसे छिपाऊँ कैसे ।
खुशियाँ भरी थी वो अपनी मुलाकातें ,
उन मुलाकातों को भुलाऊँ कैसे ।।
दिल का दर्द मै ...............................।
हर वक्त हर लम्हा,तेरी याद आती है मुझे,
रह-रह कर हर घड़ी, तड़पाती है मुझे ।
तुझे देखने को आँखें तरसती है इस कदर,
हर गली हर चौराहे पर नचाती है मुझे ।।
तरसती आँखों को तेरा तेरा दीदार कराऊँ कैसे,
दिल का दर्द मै ..............................................।
जब चलती थी तू इस मोहल्ले इस गली,
खिल उठती इस दिल की मुरझाई हुई कली ।
कहाँ गई तू मुझे यहाँ तन्हा छोड़कर ,
छोड़ गई तू इन आँखों में यादों की नमी ।।
तेरी यादों से मै पीछा छुड़ाऊँ कैसे,
दिल का दर्द मै ...............................।
तड़पता रहा हूँ हर वक्त तुझे पाने के लिए,
जैसे तड़पती है मछली जल में जाने के लिए ।
याद तेरी आती है हर वक्त हर दम मुझे मगर,
कोशिश करता हूँ तुझे भूल जाने के लिए ।।
पर तेरी उन यादों को मै भूल जाऊँ कैसे ,
दिल का दर्द मै ............................................।
याद आती है वो दिन वो रातें,
वो प्यारी सी सूरत,वो मीठी सी बातें ।
हाथों में हाथ और आँखों में आँख डालकर,
जब तुम कोई प्यारी सी कोई गीत गुनगुनाते ।।
तन्हा दिल को वो मीठी सी गीत सुनाऊँ कैसे ,
दिल का दर्द मै ...............................।
दिल में हो तुम ,ज़िगर में हो तुम्ही ,
ख्वाबों में हो तुम , नज़र में हो तुम्ही ।
तेरी यादों की बस्ती मैंने बसायी है इस तरह,
मेरे गावों में हो तुम, शहर में हो तुम्ही ।।
उजड़े हुए बस्ती को फिर से बसाऊँ कैसे ,
दिल का दर्द मै ............................................।
दिल की तड़पन सुनके एक बार आजा ,
इन आँखों की प्यास फिर से बुझाजा ।
बस जा मेरे दिल में धड़कन की तरह ,
मेरे दिल ज़िगर ,मेरे नस-नस में समाजा ।।
इस तड़पते दिल को आराम दिलाऊँ कैसे ,
दिल का दर्द मै तुमको दिखाऊँ कैसे,
आंसुओ को अपनी सबसे छिपाऊँ कैसे ।
- अरुण शर्मा
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